Wednesday, January 18, 2012
Tuesday, November 1, 2011
हे कृष्णा मुरार,ग्वाल बालो के सखा मेरे नटवर नागर मदन गोपाल
हे कृष्णा मुरार,ग्वाल बालो के सखा मेरे नटवर नागर मदन गोपाल यूँ इतना तो ना तरसाओ इन आँखों से भी अपनी याद में दो बूँद आंसू गिरवाओ हम तड़प रहे हैं बिलख रहे हैं के इन आँखों से भी तुम्हारी याद में दो आंसू गिर जाए मगर यह पागल मन छटपटा रहा हैं तोसे मिलने की आस लगा रहा हैं ओह मेरे पिया श्याम बनवारी आ जाओ ना कर के कोई बहाना गिरधारी मन व्याकुल हो रहा हैं और हो रहा अधीर भी कैसे तुझे अपना हाल बताऊ कैसे तुझे इस दिल की स्थिति बतलाऊबस श्याम पिया आ जाओ अब ना देर लगाओ आ जाओ

अपने चरणों मैं समा लो
मुझे अपने चरणों की नुपुर बना लो मोहन
नुपुर बना के
अपने चरणों से लगा लो मोहन
मुझे अपने चरणों की नुपुर बना लो मोहन
नुपुर जब शम शम बजेगी
तेरे आने का संकेत भक्तो को दिला देगी
जब स्पर्श तेरे चरणों का , मैं पाऊँगी
मैं धन्य हो जाउंगी
मोहन मोहे पुष्प बना लो
अपने चरणों मैं मिला लो
तेरे चरणों की धूल जो पुष्प भी पाये
वो भी धन्य हो जाए
मुझे अपने चरणों की धूलि बना लो
अपने चरणों मैं समा लो
मुझे अपने चरणों की नुपुर बना लो
नुपुर बना के
अपने चरणों से लगा लो
नुपुर बना के
अपने चरणों से लगा लो मोहन
मुझे अपने चरणों की नुपुर बना लो मोहन
नुपुर जब शम शम बजेगी
तेरे आने का संकेत भक्तो को दिला देगी
जब स्पर्श तेरे चरणों का , मैं पाऊँगी
मैं धन्य हो जाउंगी
मोहन मोहे पुष्प बना लो
अपने चरणों मैं मिला लो
तेरे चरणों की धूल जो पुष्प भी पाये
वो भी धन्य हो जाए
मुझे अपने चरणों की धूलि बना लो
अपने चरणों मैं समा लो
मुझे अपने चरणों की नुपुर बना लो
नुपुर बना के
अपने चरणों से लगा लो

Monday, October 17, 2011
Radha Ke Aasu Kehete Hai
This was the song for when Radha realizes that Krishna will leave her soon:
Radha Ke Aasu Kehete Hai
Kanha Ka Sang Chutana
Radha Ke Aasu Kehete Hai
Kanha Ka Sang Chutana
Nit Kanha Se Milene Ka Yeh
Pyara Bandhan Tutana
Radha Ke Aasu Kehete Hai
Kanha Ka Sang Chutana
Bachpan Ke Khel Ki Doli
Kya Kya Sapne Dikhladena
Kash Ke Sach Ho Jaye
Radha Sang Bya Rachalena
Laaj Rakho Radha Ki Maiya
Bhagya Kabhi

Kanha Ban Gaye Radhika
This was the song for when Krishna dressed up as Radha:
Kanha Ban Gaye Radhika
Aur Radha Bani Kanhayi
Paavan Premne Apane Hatho
Yeh Jodi Madhur Milayi
Rahdhe Shyaam Hare Radhe Shyaam Hare Jay Jay Shri Radhe Shyaam Hare
Rahdhe Shyaam Hare Radhe Shyaam Hare Jay Jay Shri Radhe Shyaam Hare
Mor Mukut Pitambar Odhe
Chodi Chunar Kori
Saavariya Ke Rang Rangi Hai
Barsane Ki Gori
Barsane Ki Gori
Murali Dhar Ke Adhar Dhari
Soye Murali Adhar Lagayi
Kanha Ban Gaye Radhika
Aur Radha Bani Kanhayi
Rahdhe Shyaam Hare Radhe Shyaam Hare Jay Jay Shri Radhe Shyaam Hare
Rahdhe Shyaam Hare Radhe Shyaam Hare Jay Jay Shri Radhe Shyaam Hare
Pehen Ghagara Natwar Nagar
Bane Radhika Rani
Nain Jhukaye Laaj Mein Doopi
Surat Lage Suhaani
Surat Lage Suhaani
Ooo
Vanshi Dhare Run Jhun Run Jhun
Payaliya Hai Chankari
Kanha Ban Gaye Radhika
Aur Radha Bani Kanhayi
Rahde Shyaam Hare Radhe Shyaam Hare Jay Jay Shri Radhe Shyaam Hare
Rahde Shyaam Hare Radhe Shyaam Hare Jay Jay Shri Radhe Shyaam Hare
Rahde Shyaam Hare Radhe Shyaam Hare Jay Jay Shri Radhe Shyaam Hare
Rahde Shyaam Hare Radhe Shyaam Hare Jay Jay Shri Radhe Shyaam Hare

Krishn Mein Hai Har Pal Radha,
This was a song between Radha and Krishna:
Tan Mein Base Kanhaiya
Man Mein Base Kanhaiya
Radha Ki Baaki Chitvan aur Nainen Base Kanhaiya
Hari Govinda Hari Gopala
Hari Govinda Hari Gopala
Radha Ke Jeevan Mein
Hirday mein, Dhadkan Mein
Basata Hai Murali Wala
Jai Shri Krishna, Jai Gopala,
Jai Mor Mukut, Bansi Wala
Main Mein Krishn Ki Murat Sohe
Har Pal Radha Ka Man Mohe
Krishn Mein Hai Har Pal Radha,
Krishn Lagan Mein Har Pal Khoye
Radha Ka Man Matwala
Jai Shri Krishna, Jai Gopala,
Jai Mor Mukut Bansi Wala
Tan Mein Base Kanhaiya
Man Mein Base Kanhaiya
Radha Ki Baaki Chitvan aur Nainen Base Kanhaiya
Hari Govinda Hari Gopala
Hari Govinda Hari Gopala
Radha Ke Jeevan Mein
Hirday mein, Dhadkan Mein
Basata Hai Murali Wala
Jai Shri Krishna, Jai Gopala,
Jai Mor Mukut, Bansi Wala
Jai Shri Krishna, Jai Gopala,
Jai Mor Mukut, Bansi Wala



Sunday, October 16, 2011
नित्य प्रियतमा उनकी मैं, वे केवल नित मेरे प्यारे॥
एकमात्र उनकी ही हूँ मैं, एकमात्र वे ही मेरे।
रहा न कोई, जिसको मैं हेरूँ, वा जो मुझको हेरे॥
टूट गया अग-जगसे मेरा सभी तरहका सब सबन्ध।
बचा न कुछ भी, जिससे मेरा हो कोई ममताका बन्ध॥
मेरे मनकी छोटी-मोटी सभी जानते हैं वे बात।
उनसे मेरा, उनका मुझसे सदा बना रहता संघात॥
वे मुझमें रहते नित, मैं हूँ करती नित्य उन्हींमें वास।
वे ही मेरे जीवन-जीवन, वे ही मेरे श्वासोच्छ्वास॥
कभी न हूँ मैं उनसे न्यारी, वे भी कभी न हैं न्यारे।
नित्य प्रियतमा उनकी मैं, वे केवल नित मेरे प्यारे॥

रहा न कोई, जिसको मैं हेरूँ, वा जो मुझको हेरे॥
टूट गया अग-जगसे मेरा सभी तरहका सब सबन्ध।
बचा न कुछ भी, जिससे मेरा हो कोई ममताका बन्ध॥
मेरे मनकी छोटी-मोटी सभी जानते हैं वे बात।
उनसे मेरा, उनका मुझसे सदा बना रहता संघात॥
वे मुझमें रहते नित, मैं हूँ करती नित्य उन्हींमें वास।
वे ही मेरे जीवन-जीवन, वे ही मेरे श्वासोच्छ्वास॥
कभी न हूँ मैं उनसे न्यारी, वे भी कभी न हैं न्यारे।
नित्य प्रियतमा उनकी मैं, वे केवल नित मेरे प्यारे॥

Radhe tu bdbhagini, Kon tpasya keen Teen lok k swami h jo, Wo tere aadhin
hamare sawariya bankey bihari jinka sara jag dewana hai wo sabka laadla, chitchor radha rani ka dewana kiyo hai---chaliye radha rani se hi puch le ki kaahe gulaam tero banwari----
radha se puch raha sansaar,
kaise murliwala tera ho gaya,
kaise nandlala tero ho gaya,
kaise sawariya tro ho gaya-----
TO RADHA JI BATATI HAI------
dil me banaya maine unka basera,
ankhiya basaya main unki mohni surat,
aur chod diya abhimaan--
muraliya wala mero ho gaya
sawariya mero ho gaya,
na maine koi yog lagaya,
na maine koi bhasma ramaya,
khud ko kiya kanha pe balidaan,
muraliya wala mero ho gaya,
nandlala mero ho gaya,
sawariya mero ho gaya---
ye gauri gaaye kanha radha k gungaan,
radha se puch raha sansaar,
kaise murliwala tera ho gaya,
kaise nandlala tero ho gaya,
kaise sawariya tro ho gaya-----
TO RADHA JI BATATI HAI------
dil me banaya maine unka basera,
ankhiya basaya main unki mohni surat,
aur chod diya abhimaan--
muraliya wala mero ho gaya
sawariya mero ho gaya,
na maine koi yog lagaya,
na maine koi bhasma ramaya,
khud ko kiya kanha pe balidaan,
muraliya wala mero ho gaya,
nandlala mero ho gaya,
sawariya mero ho gaya---
ye gauri gaaye kanha radha k gungaan,
saran apni mohe le lijooo-----sri radhey-jai sri krishna---

Thursday, October 13, 2011
जादू अजब जुड़ा है संग राधा नाम के
धारा तो बह रही है श्री राधा नाम की
राधा धारा राधा धारा
हम हो गए दीवाने श्री राधा नाम के
धारा तो बह रही.....
सूझे कुछ और नाही व्रन्दावन धाम के
हम हो गए दीवाने श्री राधा नाम के
धारा तो बह रही...
हम हो गए दिवान्र श्री राधा नाम के
धारा तो बह रही....
राधा के नाम का ये साया धना धना है
हर क्षण हदय में रहती राधा की कल्पना है
आते नजर बिहारी संग राधा नाम के
हम हो गए दीवाने श्री राधा नाम के
धारा तो बह रही....
अब भी समय है मूर्ख बुधि से काम ले ले
तर जायेगा यह जीवन श्री राधा नाम ले ले
नशवर है तेरा जीवन बिन राधा नाम के
हम हो गए दीवाने श्री राधा नाम के
धारा तो बह रही....
इंसान भूल है तो राधा क्षमा दया है
राधा चरण मिले तो सोने की धुल क्या है
ब्रह्मा भी सर झुका दे इस राधा नाम पे
हम हो गए दीवाने श्री राधा नाम के
धारा तो बह रही....
विशवास चाहता है तो बोल धारा धारा
तुझको सुनाई देगा खुद आप राधा राधा
हम हो गए दीवाने श्री राधा नाम के
धारा तो बह रही....
जादू अजब जुड़ा है संग राधा नाम के
हम हो गए दीवाने श्री राधा नाम के
धारा तो बह रही श्री राधा नाम की
हम हो गए श्री राधा नाम के
धारा तो बह रही..
राधा धारा राधा धारा
हम हो गए दीवाने श्री राधा नाम के
धारा तो बह रही.....
सूझे कुछ और नाही व्रन्दावन धाम के
हम हो गए दीवाने श्री राधा नाम के
धारा तो बह रही...
हम हो गए दिवान्र श्री राधा नाम के
धारा तो बह रही....
राधा के नाम का ये साया धना धना है
हर क्षण हदय में रहती राधा की कल्पना है
आते नजर बिहारी संग राधा नाम के
हम हो गए दीवाने श्री राधा नाम के
धारा तो बह रही....
अब भी समय है मूर्ख बुधि से काम ले ले
तर जायेगा यह जीवन श्री राधा नाम ले ले
नशवर है तेरा जीवन बिन राधा नाम के
हम हो गए दीवाने श्री राधा नाम के
धारा तो बह रही....
इंसान भूल है तो राधा क्षमा दया है
राधा चरण मिले तो सोने की धुल क्या है
ब्रह्मा भी सर झुका दे इस राधा नाम पे
हम हो गए दीवाने श्री राधा नाम के
धारा तो बह रही....
विशवास चाहता है तो बोल धारा धारा
तुझको सुनाई देगा खुद आप राधा राधा
हम हो गए दीवाने श्री राधा नाम के
धारा तो बह रही....
जादू अजब जुड़ा है संग राधा नाम के
हम हो गए दीवाने श्री राधा नाम के
धारा तो बह रही श्री राधा नाम की
हम हो गए श्री राधा नाम के
धारा तो बह रही..
.
सुन बरसाने वाली गुलाम तेरो बनवारी
सुन बरसाने वाली गुलाम तेरो बनवारी
तेरी पायलियाँ पे बाजे मुरलियाँ
छम छम नाचे गिरधारी
गुलाम तेरो बनवारी
सुन बरसाने....
चन्द्र की आनन पे बड़ी बड़ी अखियाँ
लट लट के घुँघराली
गुलाम तेरो बनवारी
सुन बरसाने....
बड़ी बड़ी अखियन मैं झिनो झिनो कजरा
घायल कुंज बिहारी
गुलाम तेरो बनवारी
सुन बरसाने....
वुन्दावन के रजा होकर छाछ पे नाचे मुरारी
गुलाम तेरो बनवारी
सुन बरसाने....
वुन्दावन की कुंज गलियन मैं
रस रचियो गिरधारी
गुलाम तेरो बनवारी
सुन बरसाने....
कदम की डार मैं झूलो पड़ो है, झोटा देवे बिहारी
गुलाम तेरो बनवारी
सुन बरसाने....
तेरी पायलियाँ पे बाजे मुरलियाँ
छम छम नाचे गिरधारी
गुलाम तेरो बनवारी
सुन बरसाने....
चन्द्र की आनन पे बड़ी बड़ी अखियाँ
लट लट के घुँघराली
गुलाम तेरो बनवारी
सुन बरसाने....
बड़ी बड़ी अखियन मैं झिनो झिनो कजरा
घायल कुंज बिहारी
गुलाम तेरो बनवारी
सुन बरसाने....
वुन्दावन के रजा होकर छाछ पे नाचे मुरारी
गुलाम तेरो बनवारी
सुन बरसाने....
वुन्दावन की कुंज गलियन मैं
रस रचियो गिरधारी
गुलाम तेरो बनवारी
सुन बरसाने....
कदम की डार मैं झूलो पड़ो है, झोटा देवे बिहारी
गुलाम तेरो बनवारी
सुन बरसाने....

Radhake manme basgye Shyam Bihari
Radhake manme basgye Shyam Bihari
Shyam rangme ranggyi Radha, Krsna rangme ranggyi
Bhooli sudh budh sari
Shyam naamki chunar orhe, Shyam naamki churhiya
Ang angme Shyam semaye, mitgyi sari dooriyan
Kanonme kundal gal vejayanti, mala laage pyari
Beth kadambki dali Kenheiya, murli madhur bajaaye
Sanj sakare murli ke swar, Radha Radha gaye
Is murli ki taan pe jaye, yeh duniya balihaari
Adhar sudharas murli raaje, Kanha raas rachaye
Krsna rachyiya Radha rachna, prem sudha bersaye
Prem magan ho sab hi bolo, Jai ho Bangke Bihare

Shyam rangme ranggyi Radha, Krsna rangme ranggyi
Bhooli sudh budh sari
Shyam naamki chunar orhe, Shyam naamki churhiya
Ang angme Shyam semaye, mitgyi sari dooriyan
Kanonme kundal gal vejayanti, mala laage pyari
Beth kadambki dali Kenheiya, murli madhur bajaaye
Sanj sakare murli ke swar, Radha Radha gaye
Is murli ki taan pe jaye, yeh duniya balihaari
Adhar sudharas murli raaje, Kanha raas rachaye
Krsna rachyiya Radha rachna, prem sudha bersaye
Prem magan ho sab hi bolo, Jai ho Bangke Bihare

मुझे श्याम सुंदर की दुल्हन बना दो ♥ ♥ गौरी
♥ ♥ गौरी
वृन्दवन कमल करंद है
रसिक करत रसपाल दुल्हन पियरी राधिका
दूल्हा श्याम सुजान
ऐसे वर को क्या करू जो जन्मे और मर जाये
पर ये गिरधर लाल को चुन लो अमर हो जाये
आओ मेरी सखी मुझे मेहँदी लगा दो
मेहँदी लगा दो मुझे ऐसे सजा दो
मुझे श्याम सुंदर की दुल्हन बना दो
सत्संग में मेरी बात चलाई
सतगुरु ने मेरी कीनी रे सगाई
उनको बुलाके हथलेवा तो करा दो
मुझे स्याम सुंदर की दुल्हन बना दो
ऐसी पहनू चूड़ी जो कभी ना टूटे
ऐसा चुनु दूल्हा जो कबहू ना छुटे
अटल सुहाग की बिंदिया लगा दो
मुझे श्याम सुंदर की दुल्हन बना दो
ऐसी ओढूँ चुनरी जी रंग नहीं छुटे
प्रीत का धागा कबहू नहीं टूटे
आज मेरी मोतियों से माँग भरा दो
मुझे श्याम सुंदर की दुल्हन बना दो
भक्ति का सुरमा मै आँख में लगाऊगी
दुनिया से नाता तोड़ उन्ही की हो जाऊँगी
सतगुरु को बुलाके फेरे टी डलवा दो
मुझे श्याम सुंदर की दुल्हन बना दो
बांध के घुँघर में उनको रिझाऊँगी
लेके एकतारा में श्याम श्याम गाऊँगी
सतगुरु को बुला के डोली तो सजा दो
सखियों को बुला के विदा तो करा दो
मुझे श्याम सुंदर की दुल्हन बना दो ♥ ♥ गौरी
वृन्दवन कमल करंद है
रसिक करत रसपाल दुल्हन पियरी राधिका
दूल्हा श्याम सुजान
ऐसे वर को क्या करू जो जन्मे और मर जाये
पर ये गिरधर लाल को चुन लो अमर हो जाये
आओ मेरी सखी मुझे मेहँदी लगा दो
मेहँदी लगा दो मुझे ऐसे सजा दो
मुझे श्याम सुंदर की दुल्हन बना दो
सत्संग में मेरी बात चलाई
सतगुरु ने मेरी कीनी रे सगाई
उनको बुलाके हथलेवा तो करा दो
मुझे स्याम सुंदर की दुल्हन बना दो
ऐसी पहनू चूड़ी जो कभी ना टूटे
ऐसा चुनु दूल्हा जो कबहू ना छुटे
अटल सुहाग की बिंदिया लगा दो
मुझे श्याम सुंदर की दुल्हन बना दो
ऐसी ओढूँ चुनरी जी रंग नहीं छुटे
प्रीत का धागा कबहू नहीं टूटे
आज मेरी मोतियों से माँग भरा दो
मुझे श्याम सुंदर की दुल्हन बना दो
भक्ति का सुरमा मै आँख में लगाऊगी
दुनिया से नाता तोड़ उन्ही की हो जाऊँगी
सतगुरु को बुलाके फेरे टी डलवा दो
मुझे श्याम सुंदर की दुल्हन बना दो
बांध के घुँघर में उनको रिझाऊँगी
लेके एकतारा में श्याम श्याम गाऊँगी
सतगुरु को बुला के डोली तो सजा दो
सखियों को बुला के विदा तो करा दो
मुझे श्याम सुंदर की दुल्हन बना दो ♥ ♥ गौरी

ये रथ जा रहा किस ओर,कहाँ चले हे नंदकिशोर.


ये रथ जा रहा किस ओर
कहाँ चले हे नंदकिशोर.
जा रहा क्यूं व्रज को तू छोड़
हमसे सारे रिश्तों को तोड़.
ज़रा बता दे गलती हमारी
हो गया क्या हमसे कसूर.
क्षण का विरह सहा नही जाता
जा रहा तू अब इतनी दूर.
दिन को बांसुरी बजा बुलाया
रात को संग में रास रचाया.
कैसी आग लगी मथुरा में कि
तूने आज वो सब कुछ भुलाया.
प्यार था तेरा या था छलावा
अपनापन का था वो दिखावा.
हम तो ठहरी गावं की ग्वालन
प्रेम समझ उसे सिर पे चढ़ाया.
व्रज के रक्षक कहलाते थे और
आज प्राण हमारे लिए जा रहे.
हम हुए थे तेरे सबको छोड़
आज जाके अपनी किसे कहे.
निकुंज की बातें,कुञ्ज की क्रीड़ा
क्या सब थी वो तेरी चाल.
हो गए तुम कैसे निर्मोही कि
दिखता नही तुझे हमारा हाल.
बिन देखे तुझे मर भी न पाए
जीने की तो आस ही नही.
सोचना भी हो रहा है दुष्कर
कि होगा कान्हा पास नही.
यूँ न हम तुझे जाने देंगी
रोक दो रथ यही-का-यही.
हमसे होकर गुजरेगा होगा
अगर तुझे जाना है कही.
तुझसे हम और तू ही न हो
ऐसी जिंदगी हम क्या करे.
तेरे बिना जीने से अच्छा
सामने ही हम तेरे मरे.
मेरी भक्ति कभी न छूटे
हे गोपाल मेरे


हे गोविन्द मेरे
देखो ये माया
कैसे मुझे घेरे
कभी तन को दे पीडा
कभी मन को उलझन
चाहे दूर करना तुझसे
दूरी न हो पाए भगवन
कैसा भी हो संकट
किसी भी विपदा
तेरा नाम ही हो
मेरे होठों पे सदा.
कितना भी तडपाये मुझको माया
कितनी भी दुर्बल हो मेरी काया
महसूस करूँ मै हरपल तेरी छाया
तेरी लीलों में हो मन हर पल समाया .
इतना करना हे गोविन्द कि
मेरी भक्ति कभी न छूटे
टूटे चाहे जग के सब रिश्ते
पर मेरा रिश्ता तुझसे न टूटे


Thursday, September 22, 2011
Dhani Dhani Radhika ke Charan
vrtha sruti kathasramo bata bibhemi kaivalyatah
paresa bhajanon mada yadi sukadayah tatah kim
parantu mama radhika pada rase mano majjatu
mahad bhirapi purusair apari bhavya rasotsave
agadha rasa dhamani svapada Padma seva vidhau
vidhehi madhuroj jvalam iva krtim mamadhisvari
tatha saugandhadyair bahubhi rupa carais ca yajatah
paranandam vrndavana manu carantam ca dadhato
mano me radhaya padamrdu lapadme nivasatu
nanakeli vidagdha goparmani vrdai tatha vandita
ya sanguptaya tatha upanisadam hrd yeva vidyo tate
sa radha carana dvayi mama gatih lasyai kalilamayi
premamrtaika makaranda rasau gha purnam
hrdyar apitam madhupate smaratapa mugram
nirvapayat parama sitala ma srayami
gatam me svaprestam tadapi mamnistham srunu yatha
kataksai raloke smita saha carair jata pulakam
sama aslisyamyuc cai atha ca rasaye tvatpadarasam
kandarpah kurute tavaiva kim api prepsuh prasadotsavam
sadrananda ghananuraga lahari nisyanda padambuja
dvandve sri vrsabhanu nandini sada vande tava sripadam
pritah svam bhajatopi nibhaira maha premnadhikam sarva sah
alingatyatha cumbati svavadanat tambulam asyer apayet
kante svam vanamali kamapi mama nyasyet kada mohanah
sarana jasramabhitah sravada sritesu
sri radhike tava kada caranaravindam
govinda jivana dhanam sirasa vahami

Wednesday, September 21, 2011
selfless love filled of radha and krishna
Sri Radha and Sri Krishna reside in the holy lushes of vrindavana along with sakhis. Sri Radhaji is the eternal everlasting beauty and the trinity divine is Sri Krishna. Lord Sri Krishna admires the soul of love with honor and passionate emotions like that of an Alectoris graeca partridge that admires the aura of the moon.
The beauty of Sri Radha is inexpressible in words as it exceeds all the youthful princesses of this universe. She is like a flower bud of beauty emitting light that is protected by lord Sri Krishna like a calyx, which are always together as one soul in two divine forms.
Their selfless love for each other is too pure and divine to be explained in words. The word ‘kama’ has no place in their world of vrindavan. Their endeavors are always for the sake of their behalf rather than for their own pleasure. This pureness in love can only be nurtured by divine Lord Himself. It is thus the whole trinity bows to this selfless love filled relation of Radha and Krishna
Sunday, September 18, 2011
बरसाना में दर्शनीय स्थल
सांकरी खोर : ब्रह्म पर्वत और विष्णु पर्वत के मध्य संकरी गली को ही सांकरी खोर कहते हैं। इस मार्ग से गोपियाँ दूध-दही बेचने जाया करती थीं। एक बार श्री कृष्ण जी ने गोपियों को यहाँ रोक लिया और कर के रूप में दही-माखन मांगने लगे। सखियों के आनाकानी करने पर श्रीकृष्ण एवं अन्य सखाओं ने उनकी मटकी फ़ोड़कर सारा दूध-दही लूट लिया। यहाँ प्रतिवर्ष भाद्रपद मास के शुक्ला त्रियोदशी के दिन बूढ़ीलीला(मटकीफ़ोड़ लीला) होती है।
दानगढ : यह ब्रह्म पर्वत के उत्तरी भाग में एवं सांकरी खोर की पश्चिम दिशा में है। यहाँ पर श्री कृष्ण सखाओं के साथ श्री राधिका एवं अन्य सखियों की प्रतीक्षा कर रहे थे। श्री राधा एवं अन्य सखियाँ सूर्य पूजा के बहाने विविध द्रव्यों को लेकर वहाँ से गुजर रहीं थी। तब श्री कृष्ण जी ने कहा आप यहाँ से जा रही हो आपको कर देना होगा। विशाखा सखी ने पूँछा- "तुम कौन होते हो कर लेने वाले। कृष्ण जी बोले मुझे यहाँ राजा कन्दर्पदेव ने कर लेने के लिये नियुक्त किया है। सभी सखियाँ बोलीं यहाँ की राजेश्वरी तो श्री राधा रानी हैं। श्री राधा जी के कटाक्षरूपी बाणों से आपके राजा कन्दर्प का सारा पराक्रम दूर हो जाता है। यहाँ पर दान बिहारी जी का मन्दिर है।
मानगढ़ : एक बार श्याम सुन्दर राधा जी से मिलने जा रहे थे, मार्ग में उन्हें पद्मा मिली और उसने कृष्ण जी को चन्द्रावली के विरह के बारे में बताया। श्री श्याम सुन्दर जी चन्द्रावली को सांत्वना देने चले गये। श्री राधा जी श्यामसुन्दर के न आने के कारण व्याकुल हो गयीं और उन्होंने अपनी सखियों को श्याम सुन्दर के बारे में पता करने को कहा। सखियों ने श्री राधा जी को बताया कि श्याम सुन्दर तो चन्द्रावली सखी की कुञ्ज में हास-परिहास कर रहे हैं। यह सुनकर श्रीराधाजी श्रीश्याम सुन्दर से मान कर बैठीं। रसिक श्री कृष्ण ने बड़े कौशल से श्रीराधा जी का मान भंग किया।
रत्न कुण्ड : कृष्णजी ने मुक्ता कुण्ड में मोती उगाये, जिन्हें नन्दराय जी ने वृषभानु जी के यहाँ भेजा। इनको देखकर वृषभानु चिन्तित हो गये। राधा जी ने उनकी चिन्ता को दूर करने के लिये अपनी माँ से मोती का हार लिया और इस कुण्ड पर मोती की खेती कर दी। जिससे यहाँ विभिन्न प्रकार के मोती उग आये।
विलासगढ़ : विष्णु पर्वत पर स्थित यह स्थान चिकसौली और ऊँचा गाँव से घिरा हुआ है। यहाँ पर श्री राधा जी अपनी सखियों के साथ धूला खेलतीं थीं। यहाँ विलास मन्दिर है। यहाँ श्री राधा-कृष्ण ने विविध प्रकार के क्रीड़ा-विलास किये हैं।
भानुगढ़: बरसाने में भानुगढ़ पर ही श्री राधा रानी जी का मन्दिर स्थित है। इसे वृषभानु जी का भवन कहते हैं। मन्दिर अत्यंत सुन्दर, कलात्मक बना हुआ है। राधाष्टमी पर यहाँ विशेष दर्शन होते हैं।
जय जय बरसानों गाँव जहाँ राधारानी राज रही।
पर्वत ऊपर महल मणिन कौ,
जागे आगे त्रिभुवन फ़ीकौ।
ब्रह्मा रूप धरै पर्वत कौ।
श्री चरनन कौ धाम, जहाँ राधारानी राज रही॥
मोरकुटी : यहाँ पर श्री राधा जी मय़ूरों को नृत्य सिखाती थीं। कभी-कभी श्याम सुन्दर भी मोर का रूप धारण कर वहाँ पहुँच जाते थे और राधा रानी जी से नृत्य सीखा करते। श्याम सुन्दर जान बूझ कर गलतियाँ करते और राधा जी उनको डाँटती थीं, श्रीराधा रानी को नाराज होते हुए देख श्यामसुन्दर को बहुत प्रसन्नता होती थीं।
"नाचत मोर संग स्याम, मुदित श्यामाहि रिझावत ।
तसिय कोकिल अलापत, पपहिया देत सुर, तैसोंइ मेघ गरज मृदंग बजावत ॥
तैसिय श्याम घटा निशि सी कारी, तैसिहें दामिनी कौंधै दीप दिखावत ॥
श्री हरिदास के स्वामी श्यामा रीझ श्याम हँसि कण्ठ लगावत॥
गह्वर वन : इस सघन वन को स्वयं श्री राधा रानी जी ने सुशोभित किया। यह बहुत ही रमणीय स्थान है। यह श्री राधा जी एवं अन्य सखियों का नित्य विहार स्थल है। यहाँ श्री राधा-सरोवर, रास मण्डल, शंख का चिह्न और गाय के स्तन का चिह्न दर्शनीय है। रास मण्डल के पास मयूर सरोवर है। अनेक वैष्णव रसिक संतों को यहाँ श्री किशोरी जू का साक्षात्कार हुआ है। महाप्रभु श्री बल्लभाचार्य जी की यहाँ बैठक भी है।
कृष्ण कुण्ड : चारों ओर से लता-पताओं, वृक्षों से घिरा हुआ यह सरोवर गह्वर वन की शोभा है तथा अनेक वैषणवों के लिये श्रद्धा का स्थल है। पिया-प्रियतम ने यहाँ जल केलि आदि लीलाएं की हैं।
चिकसौली : श्रीराधा जी की अष्ट सखियों में अत्यंत प्रिय चित्रा सखी का यह जन्म स्थान है। चित्रा सखी के पिता का नाम चतुर्गोप और माता का नाम चर्चिता था। चित्रा सखी श्री राधा जी के नाना प्रकार के श्रंगार करने में दक्ष, चित्रकला में योग्य तथा पशु-पक्षियों की भाषा समझने में निपुण थीं।
दोहनी कुण्ड : यह गहवर वन के समीप ही चिकसौली गाँव में स्थित हैं। इस स्थान पर महाराज वृषभानु जी की लाखों गाय रहती थीं। एक बार श्री राधा जी की गौ दोहन की इच्छा हुई, वे मटकी लेकर एक गाय का दूध दोहने लगीं। उसी समय श्रीकृष्ण भी वहाँ आ पहुँचे और बोले - सखी! तोपे दूध दोहवौ नाय आवै है, ला मैं बताऊँ। दोनों ने गाय के थन दोहना प्रारम्भ किया। तो श्यामसुन्दर ने ठिठोली करते हुए दूध की धार राधा जी के मुख पर ऐसी मारी कि राधा जी का मुख दूध से भर गया। यह सब देखकर सखियाँ हंसने लगीं।
आमें सामें बैठ दोऊ दोहत करत ठिठोर, दूध धार मुखपर पड़त दृग भये चन्द्र चकोर।
पीलीपोखर : यह बरसाना की उत्तर दिशा में है। पीलू के वृक्षॊं से घिरे इस वन में श्रीराधा जी अपनी सखियों के साथ अनेक प्रकार की क्रीड़ा करती थीं। श्याम सुन्दर जी भी गौचारण कराते हुए अपने सखाओं के साथ यहाँ पहुँच जाया करते और श्री राधा जी से मिला करते थे। माना जाता है यहाँ श्री राधा जी ने विवाह के पश्चात हल्दी से लिपे हाथ धोये थे जिससे सारा जल पीला हो गये। अतः इसे पीली पोखर कहते हैं।
ऊँचा गाँव : श्री राधा जी की अष्ट सखियों में सबसे प्रधान श्री ललिता सखी जी का यह गाँव है। श्री ललिता सखी जी तो श्रीराधा-कृष्ण की निकुंज लीलाओं की भी साक्षी हैं। श्रीराधाजी को अमित सुख प्रदान कराने वाली ललिता सखी प्रिया-प्रियतम की विविध लीलाओं में सहगामी हैं। इनके नि:स्वार्थ प्रेम के वशीभूत होने के कारण श्री युगल सरकार इन्हें हमेशा अपने साथ ही रखते हैं। स्वयं भोलेनाथ शंकर जी ने भी गोपी भाव की दीक्षा इन्हीं से ली थी।
चित्र-विचित्र शिला : एक समय सखियों ने प्रिया-प्रियतम का श्रंगार किया तथा ललिता जी के साथ श्री श्याम सुन्दर के विवाह का आयोजन किया। उनके मेहंदी रचे कर-कमल इस शिला पर टिके थे, जिसके चिह्न आज भी दर्शनीय हैं। सखियों द्वारा यहाँ की गयी चित्रकारी की सुन्दरता आज भी देखते ही बनती है।
रीठौरा : श्री वृषभानु जी के ज्येष्ठ भ्राता श्री चन्द्रभानु गोपजी का यह गाँव है। इन्हीं चन्द्रभानुजी की लाड़िली बेटी श्री चन्द्रावली जी हैं। ये श्री कृष्ण जी की अनन्य प्रिया सखी हैं। श्री कृष्ण जी इनके प्रति विशेष प्रेम रखते थे। यहाँ चन्द्रावली सरोवर तथा श्री बिट्ठलनाथ जी की बैठक है।
डभारो : यह श्री तुंगविद्या सखी जी का जन्मस्थल है।
संकेतवन : बरसाना और नंदगाँव दोनों के बीच में संकेत वन स्थित है। श्री राधा जी जावट से और श्री कृष्ण नंदगाँव से आकर यहाँ पर मिलते थे। वृन्दा देवी, वीरा देवी और सुबल सखा किसी न किसी बहाने से संकेत के द्वारा यहाँ पर प्रिया-प्रियतम का मिलन कराते थे। यहाँ पर संकेत बिहारी जी का मन्दिर, रास मण्डल स्थल, झूला मण्डप आदि दर्शनीय हैं।
अन्य स्थल : वृषभानु सरोवर, कीर्तिदा सरोवर, श्रीराधा सरोवर, ब्रजेश्वर महादेव, शूरसरोवर, मयूर सरोवर, त्रिवेणी स्थल, सखी कूप, बल्देव स्थल आदि दर्शनीय हैं।

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